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Saturday, April 12, 2014

आधी हकीकत, आधा फ़साना

आधी हकीकत, आधा फ़साना
अगले आम चुनावों के मद्देनजर इन दिनों देश भर में भाजपा नेता और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के अश्वमेध का घोड़ा निकल पड़ा है। पहले दौर में मोदी के प्रचार की मुख्य थीम विकास’ है जिसमें वे हर दूसरे मिनट वे गुजरात में अपने नेतृत्व में हुए कथित विकास’ की आधी सच्ची-आधी झूठी कहानियां सुनाते हैं। अपने भाषणों में वे बड़े-बड़े दावे करते हैं और उन दावों-कहानियों के जरिये वे शाइनिंग इंडिया’ की तर्ज पर वाईब्रेंट यानी चमकीले गुजरात माडल’ का मिथ रचते हैं। मुश्किल यह है कि इक्का-दुक्का अपवादों को छोड़कर न्यूज मीडिया कभी मोदी के श्री-मुख से निकले दावों की पड़ताल और छानबीन की कोशिश नहीं करता है। वह एक पोस्ट-आफिस की तरह मोदी के दावों और कहानियों को जस का तस लोगों तक पहुंचाने का माध्यम भर बनकर रह गया है।

मेरे पास उतने साधन नहीं हैं कि मोदी के दावों की जमीन पर जाकर पड़ताल कर सकूँ। लेकिन गूगल बाबा की कृपा से जो जानकारियां मिलती हैंवह भी मोदी के फसानों की हकीकत बयान करने के लिए काफी हैं। ऐसे ही कुछ दावों की पड़ताल और पूरे तथ्य आपके सामने पेश हैं। उम्मीद है कि इससे नेताओं खासकर प्रधानमंत्री के दावेदारों के दावों की बारीकी से पड़ताल की कोशिश कुछ आगे बढ़ेगी।    
        
फेंकूजी का सच’-1
 
फेंकूजी ने दिल्ली में फिक्की की महिला सभा में दावा किया कि उन्होंने गुजरात में स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए ५० फीसदी स्थान आरक्षित करनेवाले विधेयक को पारित किया है लेकिन गवर्नर उसे मंजूरी नहीं दे रही हैं।

तथ्य क्या हैंयह आधा और तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया सच’ है। पूरा सच यह है कि फेंकू सरकार ने गुजरात में स्थानीय प्राधिकरण कानून (संशोधन) विधेयक२००९ को पारित किया है जिसमें महिलाओं को ५० फीसदी आरक्षण देने के साथ-साथ उतनी ही प्रमुखता से अनिवार्य वोटिंग का प्रावधान भी शामिल किया गया है।

यह है मोदी का सच’ ! लेकिन मोदी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे बड़े आत्मविश्वास से दावे करते या आरोप लगाते हैं। इसके लिए वे बड़ी चतुराई से तथ्यों को आधा-अधूरा पेश करने से लेकर उसे तोड़ने-मरोड़ने से भी परहेज नहीं करते हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि मीडिया भी उनके दावों को बिना जांच-पड़ताल के सच’ की तरह पेश करने में लगा हुआ है।
               
फेंकूजी का सच’-2
इससे पहले दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में नरेन्द्र मोदी ने दावा किया था कि गुजरात के बजट में कोई घाटा नहीं है...

 सच यह है कि गुजरात के इस साल के बजट में राजस्व घाटा नहीं है लेकिन उसमें राजकोषीय घाटा २०४९६ करोड़ रूपये का है जो राज्य जी.डी.पी का २.५७ फीसदी है। यही नहींराज्य का कुल कर्ज भी पिछले साल के १.३३ लाख करोड़ रूपये से बढ़कर १.५८ लाख करोड़ रूपये हो गया है।

फेंकूजी का सच’-3

इसी सभा में नरेन्द्र मोदी ने यह भी दावा किया कि गुजरात में पिछले दस साल में बिजली की दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई है..

लेकिन सच यह है कि वहां हर तिमाही में बिजली की दरों में वृद्धि होती है.. पिछले साल भी वृद्धि की गई थी...



फेंकूजी का सच’-4
आपको पोरबंदर के विट्ठल रादडिया की शायद याद होगी। उन्हें पिछले साल अक्टूबर में एक टाल गेट पर राइफल लेकर वहां के कर्मचारियों को धमकाते हुए देखा गया था। उस समय संसद और उससे बाहर भाजपा ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर खूब हंगामा किया था। एफ.आई.आर भी हुई थी। बाद में हाई कोर्ट ने भी रादडिया की आलोचना की थी।

लेकिन पार्टी विथ डिफ़रेंस’ भाजपा और सुशासन के नए मसीहा बनकर उभर रहे मोदी ने रादडिया को पुत्र सहित भाजपा में शामिल करा लिया है। आज मोदी खुद रादडिया के स्वागत के लिए इस मौके पर मौजूद थे। लेकिन इसमें क्या आश्चर्यअलग चालचरित्र और चेहरे’ वाली पार्टी के लिए यह कोई नई बात नहीं है।

फेंकूजी का सच’-5
नरेन्द्र मोदी अपने भाषणों में एक बार भी कारपोरेट लूट के बारे में नहीं बोला है। २ जी से लेकर कोयला आवंटन तक में सत्ता और राजनेताओं की मदद से धड़ल्ले से हो रही सार्वजनिक संपत्ति की कारपोरेट लूट किसी से छुपी नहीं है।

लेकिन भ्रष्टाचार और लूट के आपूर्ति पक्ष के बारे में बात करते हुए लौहपुरुष’ के पुरुषार्थ’ की घिग्घी क्यों बंद जाती हैक्या इसलिए कि गुजरात में भी यही हो रहा है? यह है मोदी के दावों और कामों की असलियत। लेकिन क्या कोई चैनल/अखबार इस सच्चाई को सामने लाएगा?

Friday, April 11, 2014

मेरी बीवी हुई है!



मेरी बीवी हुई है!

आखिर फेकुजी ने सच स्वीकार कर लिया है कि वे शादीशुदा हैं और जसोदाबेन उनकी पत्नी का नाम है। अब तक जसोदाबेन ही मोदी को पति मान रही थीं पर अब और कितना झूठ पेस करेंगे फेकुजी इस रिश्ते की सच्चाई से कितने भागते रहे हें! इससे पहले फेकुजी ने तीन विधानसभा चुनाव लड़े और तीनों के ही नामांकन में उन्होंने वैवाहिक स्थिति दर्शाने वाले कॉलम को खाली छोड़ दिया था। उनकी यह स्वीकारोक्ति  अंतरआत्मा की आवाज नहीं है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बाद चुनाव आयोग ने 201२ में साफ कर दिया था कि अब कोई कॉलम खाली छोड़ा तो नामांकन-पत्र रद्द हो सकता है। इसी बातको नजर रखते हुए फेकुजी ने अपने नामांकन में उन्होंने वैवाहिक स्थिति दर्शाने वाले कॉलम में जसोदाबेन का नाम लिखा हें चुनाव आयोग की कड़ाई से ही जसोदाबेन को असली पहचान मिली है। सामाजिक दृष्टि से यह उस महिला की जीत है, जिसने केवल सात फेरों के सहारे पति के बिना जीवन के 45 साल काट लिए। फेहू ने शादी के इस सच को कभी सामने आने ही नहीं दिया। बीस दिन पहले हिमाचल की एक रैली में फेकुजी ने साफ तौर पर एलान किया था कि उनके आगे-पीछे कोई नहीं है।

अपनी ही जनता को धोखे में रखा
इस शादी को छुपाने की कोई जरूरत नहीं थी। जब पत्नी थी तो छुपाई क्यों? इसके पीछे एक राज हें और वोराज हे आरएसएस में प्रचारक रहते जाहिरतौर पर वे शादीशुदा होने की बात स्वीकार करते तो शायद उन्हें संघ में वह हैसियत नहीं मिलती, जिसके सहारे वे राजनीति की सीढिय़ां तेजी से चढ़ते हुए अब प्रधानमंत्री पद के दावेदार बने हैं। पिछले तीन विधानसभा चुनाव में मोदी ने नामांकन पत्र में शादीशुदा कॉलम को खाली छोड़ दिया। अगर वे उसमें अविवाहित होने का जिक्र कर देते तो आज  शायद उन पर कानून की तलवार लटक जाती। क्योकि फेकू का सच तो सामने आने वाला ही था !

वह अपनी पत्नी को सच नहीं हो सकता है जो अपने देश के लिए सच नहीं हो सकता! अब अपनी पसंद करें इनके प्रधानमंत्री पद के उम्मेदवार ने अपनी ही जनता को धोखे में रखा ऐसी पार्टी को सात्ता देना देश से झूठ बोलने जैसा होगा!


Tuesday, April 8, 2014

झूठ की सियासत!



 राजनीति का खेल निराला, झूठे का बोल बाला! भारतीय राजनीति में राजनेताओं द्वारा लोकप्रियता हासिल करने के लिए लोकहितकारी रास्ते अपनाए जाने के बजाए लोकलुभावन बातें करके जनमानस को अपनी ओर आकर्षित करने का ढर्रा हालांकि काफी पुराना हो चुका है। परंतु दिन-प्रतिदिन सियासत के इस अंदाज़ में और भी परिवर्तन आता जा रहा है। खासतौर पर गुजरात के मुख्यमंत्री द्वारा इन दिनों जिस शैली की राजनीति की जा रही है उसे देखकर तो ऐसा लगने लगा है कि गोया भविष्य की तर्ज़-ए-सियासत संभवत: मोदी शैली की ही होने वाली है।

यानी आधारहीन, तर्क विहीन, लोकलुभावन बातें करना, झूठे-सच्चे आंकड़े पेश कर लोगों की प्रशंसा हासिल करना, विपक्ष पर वार करने के लिए लालू यादव की तर्ज़ पर चुटकले छोडक़र मसखरेपन की राजनीति का सहारा लेते हुए जनता को लुभाने की कोशिश करना, अपने सांप्रदायिक एजेंडे को बड़ी चतुराई व सफाई के साथ लागू करना, विकास का झूठा ढिंढोरा पीटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मार्किटिंग ऐजेंसियों का सहारा लेना, अमिताभ बच्चन जैसे सुपर स्टार को राज्य का ब्रांड एबेंसडर बनाकर गुजरात की तरक्की का झूठा बखान करवाना तथा अपने राजनैतिक हितों के लिए अपराधियों को संरक्षण देना जैसी तमाम बातें भी शामिल हैं।

सियासत खेल
जहां तक महिला सशक्तिकरण के प्रति मोदी की चिंता व उनके बड़बोलेपन का प्रश्र है तो उन्हें महिला सशक्तिकरण के ‘माया कोडनानी मॉडल’ के रूप में भी देखा जा सकता है। क्या मोदी का महिला सशक्तिकरण इसी बात में था कि उन्होंने गुजरात दंगों की मुख्य आरोपी माया कोडनानी को आरोपी होने के बावजूद अपने मंत्रिमंडल में स्थान देकर उसे स्वास्थय मंत्री बना दिया और आज वही हत्यारी महिला देश में अब तक की सबसे लंबी सज़ा पाने वाली महिला के रूप में जेल की सलाखों के पीछे है? और अदालत द्वारा सज़ा सुनाए जाने के बाद मजबूरीवश मोदी को अपनी उस चहेती नेत्री को मंत्रीपद से हटाना पड़ा। मोदी का महिला सशक्तिकरण क्या यही है कि सोहराबुद्दीन व उसकी पत्नी कौसर बी को फर्जी एनकाऊंटर में मारने का षड्यंत्र रचने वाले अमित शाह को मंत्रिमंडल तथा संगठन में प्रमुख स्थान दिया जाए? मोदी का महिला सशक्तिकरण मॉडल उन दर्दनाक हादसों से भी याद किया जा सकता है जबकि उनकी पार्टी से संबद्ध दुर्गावाहिनी की महिला सदस्यों ने 2002 में सैकड़ों महिलाओं का कत्लेआम किया? महिला सशक्तिकरण का विचार उस समय कहां दम तोड़ रहा था जबकि गुजरात में तलवारों से गर्भवती महिलाओं के पेट से बच्चे निकाल कर औरतों व बच्चों को मारा जा रहा था? मोदी राज में इशरत जहां के रूप में एक महिला की फर्जी मुठभेढ़ में मारी जाती है और मोदी जी महिला सशक्तिकरण की बात करें यह कैसी तर्ज़-ए-सियासत है?

मोदी यदि वास्तव में यह कहते हैं कि अब वे गुजरात का क़र्ज़ उतार चुके हैं और देश का क़र्ज़ उतारना चाहते हैं तो सर्वप्रथम उन्हें महिला सशक्तिकरण के संबंध में दिए जा रहे अपने विचारों पर अमल करते हुए प्रधानमंत्री बनने के सपने देखने बंद कर देने चाहिए और पार्टी की दूसरी लोकप्रिय नेत्री सुषमा स्वराज के नाम को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे करना चाहिए। वैसे तो उन के आलोचक उनकी अपनी छोड़ी हुई पत्नी तथा उनकी मां की स्थिति को देखकर ही उनके महिला सशक्तिकरण पर दिए गए भाषण को हास्यास्पद व शत-प्रतिशत लोक लुभावन बताते हैं। जो भी हो मोदी अपनी अजब-गज़ब तर्ज़ ए-सियासत के बल पर देश व मीडिया को अपनी ओर आकर्षित करने में ज़रूर माहिर हैं। कहीं ऐसा न हो कि इसी लोकलुभावन, ढोंगपूर्ण व अहंकारपूर्ण एवं झूठ व फरेब पर आधारित राजनैतिक शैली का देश में बोलबाला हो। और यदि ऐसा होता है तो निश्चित रूप से राजनीति व राजनेताओं पर से जनता का रहा-सहा विश्वास बिल्कुल ही उठ जाएगा। आखिर कब तक खेलेंगे आप ये झूठ का सियासत खेल?

Thursday, April 3, 2014

जूठी बाते जूठा विकास


                फेकू चले दिल्ही दर्शन


गुजरात के मुख्यमंत्री और बीजेपी के पीएम उमेद्वार नरेद्र मोदी अपनी हर चुनावी रेलीयो में कहते हे की “गुजरात में राम राज्य हें” पर आकडे जूठ नहीं कहते गुजरात में 'गरीबों की 41 फीसदी से प्रतिशत 18.5 गंभीर गरीबी में रहते हैं. हर पांचवां व्यक्ति किसी के लिए एक मॉडल होना गरीबी के दावे में घोर गरीबी और 41 फीसदी में रहती है ! बल्कि सचाई तो यही हें की एक अध्ययन में 41 फीसदी गरीब अलावा, प्रतिशत और 17 गुजरात में गरीबी की चपेट में हैं 

गुजरात राज्य के विकास की जरूरत के मामले में 12 वें स्थान पर रहीं और "कम विकसित" श्रेणी में आता है. यह देश में सबसे विकसित राज्य नहीं है ! इसी प्रकार गुजरात सरकार  कृषि विकास का दावा करती है कि एक राज्य, भूख से पीड़ित इसकी जनसंख्या का 25 प्रतिशत है और उसकी हालत ओडिशा  से भी बदतर है.

इस तरह जनसंख्या के राष्ट्रीय औसत 23.31 है जबकि गुजरात, भूख से प्रभावित आबादी के सर्वोच्च प्रतिशत के साथ राज्यों के संदर्भ में, 17 राज्यों के बाहर (भूख का सामना कर इसकी जनसंख्या का 24.69 फीसदी) 13 वें स्थान पर है ! 


गुजरात में किसानों की सच्ची तस्वीर
कल तक गुजरात के किसानों की आत्महत्या नहीं देखी थी. विधान सभा में गुजरात सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के हवाले से 2,008-2,013 कहा, 122 किसानों की वजह से चुकाने की अक्षमता को आत्महत्या कर ली उनके ऋण, फसल के नुकसान और अन्य कारणों से.

भारत की जनता समझदार है। गरीब आदिवासी को संपन्न बनाने से भारत चमकेगा। भ्रष्टाचार और विकास के गुजरात मॉडल की बात करने से काम नहीं चलेगा। लोगों को दर्द समझना होगा। जिसे वे नहीं समझते, न समझना चाहते हैं। और न समझेंगे... सिर्फ बातों से काम नहीं चलेगा ! क्या यही राम राज्य नहीं अब और नहीं सच में  यही हें फेकू की जूठी बाते और फेकू का जूठा विकास !